9 भाइयों की असली कहानी

9 भाईयों की कहानी भी कुछ ऐसी ही है जैसी, 14 बेटियों के बाप वाली है, वहां लड़के की चाहत में 14 लड़की होती हैं। और इस कहानी में 9 भाई, बहन ना होने की वजह होते है, लेकिन इस कहानी में एक ट्विस्ट है । तो शुरू करते है शुरू से, एक माता पिता के 9 बेटे रहते है, 9 लड़के होने का कारण ये है कि उन माता पिता की ख्वाहिश थी कि उनके घर में एक लड़की होती तो घर पर साक्षात लक्ष्मी आ जाती। लेकिन लड़की के इंतजार में 9 लड़के हो जाते है। हड्डे कट्टे नौजवान बचपन से जवान होकर वो 9 भाई अपने नगर में काफी चर्चित थे । उनकी सबकी शादी और बच्चे भी हो जाते हैं, लेकिन शादी बच्चे होकर भी वो कभी अलग नहीं हुए, साथ साथ खाते कमाते और एक घर में रहते, उनके घर तो खाना भी ऐसा बनता था जैसे, बारात के लिए। लेकिन खाने की कोई कमी नहीं थी, क्योंकि सब भाई पैसे नौकरी वाले रहते। एक दिन उनके घर पर, उनका खास रिश्तेदार आते है। और उनको सलाह देता है कि अब आप सब के बच्चे बड़े हो गए है। अब आप लोगों को अलग अलग हो जाना चाहिए, कुछ फैसले बड़े होकर अलग लेने पड़ते है। रिश्तेदार की बात सुन कर उन 9 भाईयों का दिल मानता तो नहीं है मगर रिश्तेदार और अगल बगल के लोग क्या सोचते है ये भी उनको सोचना पड़ता, फिर उस दिन से वो सारे भाई अलग अलग रहने का विचार बना लेते है। लेकिन एक दूसरे के लिए प्यार कभी कम नहीं हुआ।